दोस्तों समाज (society) और धर्म (Religion) दोनों ही हमारे जीवन का महत्वपुड अंग है,हमारा सामाजिक ढाचा और धार्मिक ढाचा इस तरह मिल गए है की सामाजिक ढाचा पूरी तरह से धार्मिक ढाचे में बदल गया है !वास्तविकरूप से धर्म और समाज दोनों एक दूसरे से बिलकुल भिन्न है क्योकि समाज का निर्माण मनुष्य ने स्वयम किया किया है लेकिन धर्म चुकी से सम्बंधित है इसलिए यह केवल एक खोज है अर्थात ईश्वर तक पहुचने का मार्ग या ईश्वर को जाने का मार्ग,परन्तु हम इस दुनिया में विभिन्न धर्मो को देखते है जिनके दैनिक किर्या-कलाप और सामजिक ढाचा भिन्न भिन्न है,उदाहरण के लिए हम हिन्दू और मुस्लिम धर्म को ही ले, दोनों ही धर्मो को माननेवाले ईश्वर को मानते है लेकिन उनका सामाजिक ढाचा भिन्न है! ऐसा क्यों है ,वास्तविकता यह है की दोनों धर्म नहीं बल्कि दो भिन्न भिन्न संस्कृतिया है एक भारतीय और दूसरी अरबी,हम यह कह सकते है की हिन्दू धर्म शुद्ध रूप से एक सांस्कृतिक धर्म है जबकि मुस्लिम,ईसाई और दुसरे धर्म अपने अपने पैगम्बरों के कारण पैगाम्बरवादी धर्म है ,वास्तव में संस्कृतिया धर्म की पीठ पर सवार होकर ही एक जगह से दूसरी जगह गयी !
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